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Cow Vigyaan

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गाय का आध्यात्मिक व वैज्ञानिक महत्व


समुद्र मंथन के समय गाय माता कामधेनु प्रकट हुई , जिनमे 33 कोटी देवी देवताओ का वास है | भारतीय गाय एक मात्र ऐसा प्राणी है जिसका तापमान 36-37 डिग्री होता है जो की आदमी के तापमान के बिल्कुल बराबर है, जिसकी वजह से गाय का दूध व घी बच्चे से लेकर वृद्ध आदमी तक को पचाने के लिए उपयुक्त है | भारतीय गाय के दूध मे A2 प्रोटीन होता है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए अति उत्तम मन जाता है |

गाय एक मात्र प्राणी है जिसके दूध मे विटामिन D पाया जाता है |

आध्यात्मिक दृष्टि से तो गाय का महत्व है ही बल्कि अर्थव्यवस्था के हिसाब से भी गाय का बहुत महत्व है| बिना गाय के देश के विकास की कल्पना मात्र ही है |

किसान का विकास व आय बढ़ाने की बात गाय के बिना सोचने का कोई मतलब ही नहीं |

इतिहास मे भारतीय गाय की नस्ल मे मिलावट होने का माह पाप किया गया जिससे गाय का ही नहीं बल्कि देश के मूल्यों का भी घोर पाटन हुआ |

गाय के गोबर व गोउमूत्र मे इतनी शक्ति है कि एक अकेली गाय के गोबर व गोउमूत्र से 2 एकड़ की खेत बिना किसी जहरीले खाद व उर्वरक के उन्नत खेती की जा सकती है जिससे न केवल किसान की लागत काम होगी बल्कि अच्छी गुणवता के खाद पढ़ार्थों का उत्पादन बढ़ेगा जिसकी आज हमे भयंकर बीमारियों से बचने के लिए अत्यधिक जरूरत है |

इतना समझ लीजिए की अगर गाय सुखी होगी तभी मानव सुखी होगा |

पंचगव्य का निर्माण गाय के दूध, दही, घी, मूत्र, गोबर के द्वारा किया जाता है। पंचगव्य द्वारा शरीर के रोगनिरोधक क्षमता को बढ़ाकर रोगों को दूर किया जाता है। गोमूत्र में प्रति ऑक्सीकरण की क्षमता के कारण डीएनए को नष्ट होने से बचाया जा सकता है। गाय के गोबर का चर्म रोगों में उपचारीय महत्व सर्वविदित है। दही एवं घी के पोषण मान की उच्चता से सभी परिचित हैं। दूध का प्रयोग विभिन्न प्रकार से भारतीय संस्कृति में पुरातन काल से होता आ रहा है। घी का प्रयोग शरीर की क्षमता को बढ़ाने एवं मानसिक विकास के लिए किया जाता है। दही में सुपाच्य प्रोटीन एवं लाभकारी जीवाणु होते हैं जो क्षुधा को बढ़ाने में सहायता करते हैं। पंचगव्य का निर्माण देसी मुक्त वन विचरण करने वाली गायों से प्राप्त उत्पादों द्वारा ही करना चाहिए।आयुर्वेद में पंचगव्य से *कैंसर* जैसे भयानक रोग तक का निदान किया जाता है। दिल्ली के पश्चिमी पंजाबी बाग स्थित एक चेरिटेबल अस्पताल में पंचगव्य आधारित आयुर्वेदिक कैंसर चिकित्सा के जरिये सैंकड़ों मरीजों को ठीक करने का दावा किया जाता है।

Spiritual & Scientific Significance of cow


During the churning of the ocean, the cow mother Kamadhenu appeared, in which 33 Koti are the abode of Gods and Goddesses. Indian cow is the only creature whose temperature is 36-37 degrees which is exactly equal to the temperature of man, due to which cow's milk and ghee is suitable for digesting from child to old man. Indian cow's milk contains A2 protein which is considered to be very good for our health.

Cow is the only animal whose vitamin D is found in milk.

Not only is cow important from a spiritual point of view, but also according to the economy, cow has great importance. Without cow, the development of the country is just a fantasy.

There is no point in thinking about the development and income of the farmer without the cow.

In history, the month of adulteration of Indian cow's perishable sins was committed, which resulted in a severe depleting of not only the cow but also the values of the country.

There is so much power in cow dung and cow urine that a 2 acre field can be cultivated from a single cow dung and cow urine without any poisonous manure and fertilizer, which will not only cost the farmer but also provide good quality fertilizer for the students. Production will increase, which we need today to avoid serious diseases.

So understand that if the cow is happy then only humans will be happy.

Panchagavya is made by cow's milk, curd, ghee, urine, cow dung. Panchagavya cures diseases by increasing the immunity capacity of the body. DNA can be saved from being destroyed due to its ability to oxidize per cow. The treatment of cow dung in skin diseases is well known. Everyone is familiar with the high nutritional value of yogurt and ghee. Milk has been used in various ways in Indian culture since ancient times. Ghee is used to increase the capacity of the body and for mental development. Yogurt contains digestible proteins and beneficial bacteria that help in increasing the apps. Panchagavya should be made only from the products obtained from indigenous free forest wandering cows. In the Ayurveda, panchagavya is diagnosed with terrible diseases like * cancer *. A charitable hospital in West Punjabi Bagh, Delhi, claims to cure hundreds of patients through panchgavya-based Ayurvedic cancer therapy.

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